(1)
गणित की सभी शाखाओं में प्राचीनतम कौन सी है।
(1) रेखागणित
(2) सांख्यिकी
(3) बीजगणित
(4) अंकगणित
(2)
रेखागणित में प्रायोगिक स्तर पर प्रयुक्त होने वाली शिक्षण विधि है।
(1) प्रदर्शन विधि
(2) आगमन विधि
(3) निगमन विधि
(4) उपर्युक्त सभी
(3)
एक अच्छी मूल्यांकन विधि वह है जिसमें देखा जाए-
(1) शिक्षण हेतु अपनाई गई विधि
(2) बालक के व्यवहार में परिवर्तन करने की विधि
(3) पाठ्यवस्तु से सम्बन्धित विधि
(4) उपर्युक्त सभी
(4)
अनुप्रयोग सम्बन्धी प्राप्य उद्देश्य की प्राप्ति होती है, जब छात्र -
(1) सम्बन्धित प्रत्ययों में भिन्नता बताता है।
(2) गणितीय अवधारणा की व्याख्या कर सकता है।
(3) समस्या हल करने की उपयुक्त विधि चुनता है।
(4) उपर्युक्त सभी
(5)
शिक्षण प्रक्रिया का अंतिम सोपान है।
(1) उद्देश्य
(2) अधिगम
(3) मूल्यांकन
(4) उपर्युक्त सभी
(6)
पाठ योजना का भाग नहीं होते है।
(1) प्राप्य उद्देश्य
(2) शिक्षा के उद्देश्य
(3) पाठ प्रस्तुति योजना
(4) उपर्युक्त सभी
(7)
गणित के मानसिक सिद्धान्त के जन्मदाता है।
(1) आर्यभट्ट
(2) न्यूटन
(3) प्लेटो
(4) सी. वी. रमन
(8)
खोज विधि का प्रतिपादन किसने किया था।
(1) प्रो. ऑर्मस्ट्रांग
(2) किलपैट्रिक
(3) डयूबी
(4) स्किनर
(9)
निगमन विधि का उपयोग है।
(1) मानसिक क्षमता बढ़ाना
(2) वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना
(3) सूत्र का प्रयोग करना
(4) सूत्र का प्रयोग करना
(10)
'सामान्य से विशिष्ट की ओर' शिक्षण सूत्र पर आधारित विधि है-
(1) आगमन विधि
(2) आगमन - निगमन विधि
(3) विश्लेषण विधि
(4) निगमन विधि
(11)
'विशिष्ट से सामान्य' तथा 'स्थूल से सूक्ष्म' की ओर शिक्षण सूत्र पर आधारित विधि है।
(1) आगमन विधि
(2) संश्लेषण विधि
(3) विश्लेषण विधि
(4) निगमन विधि
(12)
गणित शिक्षण के प्रेरणात्मक सिद्धान्त के सूत्र है।
(1) सक्रियता
(2) सजीवता
(3) उपर्युक्त दोनों
(4) इनमें से कोई नहीं
(13)
गणित शिक्षण के लिए पाठ योजना का निर्माण आवश्यक है।
(1) शिक्षक को पाठ याद होता है।
(2) विषय वस्तु का विकास सुव्यवस्थित ढंग से किया जाता है।
(3) छात्रों की कमजोरियों का पता लगता है।
(4) विषय का गूढ़ अध्ययन कराया जा सकता है।
(14)
रेखागणित में कौन से आयाम को प्रमुख स्थान दिया जाता है।
(1) आकार
(2) विस्तार
(3) स्थिति
(4) उपर्युक्त सभी
(15)
गणित विषय का सबसे अधिक सम्बन्ध होता है।
(1) नागरिक शास्त्र
(2) भूगोल
(3) विज्ञान के साथ
(4) समाजशास्त्र
(16)
वह उद्देश्य जो शिक्षक गणित पढ़ाने के बाद कक्षा में ही प्राप्त कर लेता है, उसे कहा जाता है।
(1) सांस्कृतिक उद्देश्य
(2) सामाजिक उद्देश्य
(3) पारिवारिक उद्देश्य
(4) शिक्षण उद्देश्य
(17)
गणित शिक्षण में मूल्यांकन में ब्ल्यू प्रिन्ट है।
(1) विद्यालय की आधारशिला
(2) प्रश्न पत्र निर्माण की आधारशिला
(3) शिक्षण की आधारशिला
(4) छात्रों की आधारशिला
(18)
किस विधि के अन्तर्गत यह निर्धारित किया जाता है कि पूरे अध्याय में कितने शीर्षकों के अन्तर्गत व कितने कालांशों व किन किन दिनों को पढ़ाना है।
(1) इकाई योजना विधि
(2) आगमन विधि
(3) खोज विधि
(4) निगमन विधि
(19)
गणित के नियम व निष्कर्ष कैसे होते है।
(1) वस्तुनिष्ठ
(2) सार्वभौमिक
(3) वस्तुनिष्ठ व सार्वभौमिक
(4) कोई नहीं
(20)
आगमन विधि का एक प्रमुख दोष है।
(1) ज्ञान अस्थायी होता है।
(2) ज्ञानार्जन बहुत धीमी गति से होता है।
(3) विषय नीरस हो जाता है।
(4) आत्मनिर्भरता कम हेाती है।